
एस.एच.ओ. (थानाध्यक्ष) रात के स्टाफ की ब्रीफिंग लेते हुए बोला, " तुम सब रात की गश्त ढंग से क्यों नहीं करते. आज डी.सी.पी. ने मुझे बुलाकर फिर से मेरी माँ-बहन एक कर डाली. अगर तुम्हें कामचोरी की गन्दी आदत पड़ ही गई है तो कम से कम पत्रकार अरोड़ा की गली में तो एक चक्कर लगा आया करो. साला हर दूसरे दिन अपने अखबार में खबर छाप देता है कि इलाके की पुलिस गश्त नहीं करती."
रात का स्टाफ एक सुर में बोला, "जनाब हम सब नियम से रात को थाने के इलाके के चप्पे-२ में गश्त करते हैं." एस.एच.ओ. ने उनसे खीज कर पूछा, "तो फिर अरोड़ा अपने अखबार में यह खबर क्यों छापता है कि तुम सब गश्त नहीं करते?" रात के स्टाफ में से एक बुजुर्ग हवलदार बोला, "जनाब अरोड़ा हमसे हफ्ता मांगता है. जब हमने उसे हफ्ता देने से साफ़ मना कर दिया तो अपने अखबार में उलटी-सीधी ख़बरें छापनी शुरू कर दीं." एस.एच.ओ. चीख कर बोला, "मुझे कुछ नहीं सुनना. तुम सभी इस समस्या का हल खोजो. मैं जीवन में पहली बार एस.एच.ओ. लगा हूँ. अगर मैं यहाँ से हटा तो तुम सबको भी चैन से नहीं जीने दूंगा."
रात के स्टाफ ने आधी रात तक इस समस्या के बारे में सोच-विचार किया और अपने हर सदस्य को यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वह रात को हर १५ मिनटों के बाद पत्रकार अरोड़ा के घर के दरवाजे को खटखटा उसे जगाकर सलाम मारेगा और अपनी हाजिरी लगाएगा. यह सिलसिला दो दिन तक लगातार चला. तीसरे दिन पत्रकार अरोड़ा के अखबार में खबर छपी थी "रात को पुलिस की मुस्तैदी भरी नियमित गश्त से इलाके में शान्ति कायम."
पुलिस से भी हफ्ता ? :):) बढ़िया तरीका निकाला ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबढ़िया है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंBAHOOT KHOOB. @ UDAY TAMHANEY. BHOPAL.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबढ़िया पोस्ट ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
प्रत्युत्तर देंहटाएंbilkul sahi...
प्रत्युत्तर देंहटाएंha ha ha ha sahi kiya ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंअच्छा किया साले को टीक किया जो ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंरवि
काजल कुमार जी, उदय जी, कविता वर्मा जी, संतोष वर्मा जी और रवि जी आपका सभी का यहाँ तक आने के लिए आभार...
प्रत्युत्तर देंहटाएंकाश ऐसा हो पाता तो बात कुछ और होती
प्रत्युत्तर देंहटाएंअच्छी लघुकथा। सही कलयुग है!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसंदीप पंवार जी एवं अनुराग शर्मा जी आप दोनों का प्रतिक्रिया देने के लिए शुक्रिया...
प्रत्युत्तर देंहटाएंha ha ha ha ha
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर
प्रत्युत्तर देंहटाएंमहावीर मित्तल जी और डॉ. संतोष पवार साब आप दोनों का आभार...
प्रत्युत्तर देंहटाएंसही सजा arora को दे दी
प्रत्युत्तर देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुक्रिया प्रदीप महाजन भाई आपका स्नेह हर पोस्ट पर मिलता है और आशा है आगे भी मिलता रहेगा...
प्रत्युत्तर देंहटाएंमुन्ना भाई टाईप समस्या निवारण सही रहा.. :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुक्रिया समीर लाल जी यूं ही उड़न तश्तरी पर सवार हो सुमित के तड़के का आनंद लेने आते रहें...
प्रत्युत्तर देंहटाएंअच्छा सबक मिला अरोड़ा के बच्चे को.
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