आज रात्रि सेवा के दौरान ही निश्चय किया कि आज मैं भी ड्यूटी समाप्त होने के उपरान्त रामलीला मैदान जाऊंगा और अन्ना जी को अनशन तोड़ते देखूँगा. अपने साथ चलने के लिए मैंने अन्ना भाई व पद्म सिंह जी को आमंत्रित किया किन्तु अन्ना भाई अपनी तबियत तथा पद्म सिंह जी, जिन्होंने पिछले कई दिन रामलीला मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई, किसी कार्य में व्यस्त होने के कारण मेरे साथ चलने को तैयार न हो सके. मेट्रो से यात्रा करते हुए नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन उतरा तो 10.15 बज चुके थे यानी कि मुझे अन्ना जी द्वारा अनशन तोड़ते देखने का सौभाग्य नहीं मिलने वाला था. खैर मैं देशभक्ति के नारे लगाती टोलियों के साथ मेट्रो स्टेशन से बाहर निकला.

मेट्रो स्टेशन के बाहर ''मैं अन्ना हूँ'' लिखी हुईं टोपियाँ मिल रहीं थी एक टोपी मैंने भी ले ली. मेरे साथ चल रहे एक बंधु ने मुझे सुझाव दिया कि अपने चेहरे पर तिरंगा बनवा लो तो मैंने कहा कि तिरंगा मेरे दिल में है सो मैं नहीं समझता कि मैं कोई दिखावा करूं. रामलीला मैदान के गेट पर पहुंचा वहां बहुत भीड़ थी आज मेरे जैसे बचे-खुचे मानव अपनी
उपस्थिति वहां दर्ज करवाने आये हुए थे.

वहां से निकल कर मेट्रो स्टेशन आया तो पता चला कि बढ़ती भीड़ के कारण मेट्रो स्टेशन बंद कर दिया गया था. उस भीड़-भड़क्के को चीर कर मिन्टो रोड पर पहुँचा. वहां से बस में सवार हो घर की ओर चल पड़ा. बस में बैठे एक युवा लड़के ने मुझसे पूछा, ''अन्ना का क्या रहा?'' मैंने प्रतिउत्तर में उससे पूछा कि क्या वह टी.वी. नहीं देखता. तो उसने उसके घर का केबल टी.वी. खराब है यह कहते हुए उसने अपना थूक भी मेरे चेहरे को भेंट कर दिया. मैंने उसे घूर के देखा तो वह झेंप गया और दूसरे ओर मुँह करके किसी से अपने मोबाइल से बतियाने लगा. उत्साह में आकर दूसरे रूट वाली बस में बैठ गया था सो घर से एक किलोमीटर दूर उतर कर पैदल आना पड़ा. सिर पर ''मैं अन्ना हूँ'' की टोपी धारण किये जब मैं घर की ओर बढ़ रहा था तो ऐसा लग रहा था कि अन्ना मेरे भीतर ही उपस्थित थे और मुझसे कह रहे थे, ''बेटा सुमित प्रताप सिंह मैंने जो करना था कर दिया अब तुम युवाओं को ही इस देश को एक नई दिशा देनी है."
"मैं भी अन्ना हूँ"
प्रत्युत्तर देंहटाएंnice job.
प्रत्युत्तर देंहटाएंजय हो!! जय हो ! वंदे मातरम ... भारत माता की जय....
प्रत्युत्तर देंहटाएंचलो आपके साथ अन्नाभाई भी हो आए, आपके मन में मौजूद रहते हैं सदा, क्या इंकार करोगे, बोलो 'मैं अन्ना हूं' पर सब लोगों ने एक अकेले निरीह भ्रष्टाचार के साथ खूब किया है अत्याचार।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत से दूसरे भी हैं जो वहां जा न सके पर साथ ज़रूर हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंअन्ना को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सभी का साथ मिला ......जय हिंद
प्रत्युत्तर देंहटाएंयही जज़्बा बना रहना चाहिए ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंhey there sumitketadke.blogspot.com admin discovered your site via search engine but it was hard to find and I see you could have more visitors because there are not so many comments yet. I have found website which offer to dramatically increase traffic to your blog http://xrumerservice.org they claim they managed to get close to 1000 visitors/day using their services you could also get lot more targeted traffic from search engines as you have now. I used their services and got significantly more visitors to my blog. Hope this helps :) They offer keyword ranking tool seo sales backlink service quality backlinks Take care. Jay
प्रत्युत्तर देंहटाएं